Tuesday, 12 May 2015
Sunday, 10 May 2015
Friday, 8 May 2015
तुम इतनी खूबसूरत हो की
तुमपर किसी दिन
जी भर कर
कविता लिखूं
तुम्हे प्रकृति से
एकाकार करते हुए
जिंदगी
जिंदगी बाकि न रहे
पर, तुम्हे चाहना
हमेशा शेष रहेगा
bahut कुछ
मन में होता है
लिखने को किन्तु
जब तुम्हारी
सुंदरता महसूस होती है
ये दुनिया को बताने का मन होता है
की, तुम, कितनी
पवित्र , सात्विक व् सुंदर हो
तुमपर किसी दिन
जी भर कर
कविता लिखूं
तुम्हे प्रकृति से
एकाकार करते हुए
जिंदगी
जिंदगी बाकि न रहे
पर, तुम्हे चाहना
हमेशा शेष रहेगा
bahut कुछ
मन में होता है
लिखने को किन्तु
जब तुम्हारी
सुंदरता महसूस होती है
ये दुनिया को बताने का मन होता है
की, तुम, कितनी
पवित्र , सात्विक व् सुंदर हो
Tuesday, 5 May 2015
Sunday, 3 May 2015
बहुत सरल हो तुम
और तुम्हारी हंसी
जैसे
ग्रीष्म में बोगनवोलिया का खिलना
और , खिल कर लरजना
tum
गुलमोहर का
ख्वाब हो
तुम्हारे कपोलों का स्पर्श
जैसे
खिलते पंखड़ी को छूना
जैसे गंगा की उछलती लहरों को
हाथों। ……। ये
तुम हो,
तुम i know very well u
सिर्फ तुम्हे महसूस करना
और, तुम्हारे बारे में सोचते हुए
दूरतक चलते चले जाना
यूँ ही
निरूद्देश्य जीवन में भी
तुम्हारी वजह से
एक
वजह पा जाना
ये सब,
तुम्हारी वजह से है
जान। ……।
बहुत दर लगता है
प्यार से
आकर्षण से
आसक्ति से
अपने को छलने का
तबाह करने का
ये भी एक
नशा है जिसे हम
प्यार कहते है
और तुम्हारी हंसी
जैसे
ग्रीष्म में बोगनवोलिया का खिलना
और , खिल कर लरजना
tum
गुलमोहर का
ख्वाब हो
तुम्हारे कपोलों का स्पर्श
जैसे
खिलते पंखड़ी को छूना
जैसे गंगा की उछलती लहरों को
हाथों। ……। ये
तुम हो,
तुम i know very well u
सिर्फ तुम्हे महसूस करना
और, तुम्हारे बारे में सोचते हुए
दूरतक चलते चले जाना
यूँ ही
निरूद्देश्य जीवन में भी
तुम्हारी वजह से
एक
वजह पा जाना
ये सब,
तुम्हारी वजह से है
जान। ……।
बहुत दर लगता है
प्यार से
आकर्षण से
आसक्ति से
अपने को छलने का
तबाह करने का
ये भी एक
नशा है जिसे हम
प्यार कहते है
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